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Poetry


अँधेरों को चीरती किरणें सूरज की;

अँधेरों के सदा रहने के वहम को तोड़ती हैं। 



कामनी गुप्ता***

जम्मू! 


कभी समुंद्र भी नहीं डुबो पाता हौंसले;

कभी साहिल से भी लहरों संग फिसल जाते हैं हम। 


कामनी गुप्ता***

जम्मू!


 भटका देते हैं शब्द कभी मंज़िल से और

फिर जाने क्या कहता है ये मौन। 


कामनी गुप्ता***

जम्मू !


ख्बाबों और ख्वाहिशों का सिलसिला सा है;

पूरा होता तो है पर खत्म नहीं होता। 


कामनी गुप्ता***

जम्मू!



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