मैं आज़ाद हूँ। भर *उड़ान* ऐ बोझिल मन ,चल अब सोच न इतना, मैं आज़ाद हूँ ..ये बोल ह्रदय से अब डरेगा कितना! कब तक *ज़ुबान* से औरों की बस भाषा बोलेगा, अपने मन की भी कर ले अब, जाने जीना है जितना! मैं आज़ाद हूँ... अपने ही अपनों को छलते, देख आंसू नैनों से बहते, कब तक करेगा औरों के लिए खुद को *कुर्बान* सुनना! मैं आज़ाद हूँ.... थम जाएगा मन का *तूफ़ान* , वक्त लगेगा न हो परेशान, जो बीता समय जाने दे ,जो पास है खुशी से जी ले उतना! मैं आज़ाद हूँ.... तोड़ बेड़ियाँ, होंठो पर *मुस्कान* लिए कर ये ऐलान, पँख फैला आज उड़ नील गगन में कि मैं खुश हूँ इतना! मैं आज़ाद हूँ..... कामनी गुप्ता *** जम्मू!