सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

  खुश रहें सब सदा जब हम ये चाहेंगे शब्द हैं ये फिर वापिस लौट के आएंगे। कामनी गुप्ता*** जम्मू! 
हाल की पोस्ट
 इक जुगनू और रोशनी की आस है क्यों आखिर,  ज़िन्दगी में किसने सब पाकर भी सब कुछ पा लिया आखिर।  कामनी गुप्ता*** जम्मू!
 फासले यूँ भी तो कहीं दरमियाँ रह ही जाते हैं,  कितनी ही बातें हम चाह कर भी कह नहीं पाते हैं।  कामनी गुप्ता*** जम्मू!

गुफ्तगू

  ख्बाबों में उनसे यूँ ही गुफ्तगू होती रही रातभर।   सितारों की महफ़िल में जुगनू खोजती रहीं रातभर।  कामनी गुप्ता*** जम्मू! 
 मैं आज़ाद हूँ।  भर *उड़ान* ऐ  बोझिल मन ,चल अब सोच न इतना,  मैं आज़ाद हूँ ..ये बोल ह्रदय से अब डरेगा कितना!  कब तक *ज़ुबान*  से औरों की बस भाषा बोलेगा,  अपने मन की भी कर ले अब, जाने जीना है जितना!  मैं आज़ाद हूँ...  अपने ही अपनों को छलते, देख आंसू नैनों से बहते,  कब तक करेगा औरों  के लिए खुद को *कुर्बान* सुनना!   मैं आज़ाद हूँ....  थम जाएगा मन का *तूफ़ान* , वक्त लगेगा न हो परेशान,  जो बीता समय जाने दे ,जो पास है खुशी से जी ले उतना!  मैं आज़ाद हूँ....  तोड़ बेड़ियाँ, होंठो पर *मुस्कान*  लिए कर ये ऐलान,   पँख फैला आज उड़ नील गगन में कि मैं खुश हूँ इतना!  मैं आज़ाद हूँ.....  कामनी गुप्ता *** जम्मू!

Poetry

अँधेरों को चीरती किरणें सूरज की; अँधेरों के सदा रहने के वहम को तोड़ती हैं।  कामनी गुप्ता*** जम्मू!  कभी समुंद्र भी नहीं डुबो पाता हौंसले; कभी साहिल से भी लहरों संग फिसल जाते हैं हम।  कामनी गुप्ता*** जम्मू!  भटका देते हैं शब्द कभी मंज़िल से और फिर जाने क्या कहता है ये मौन।  कामनी गुप्ता*** जम्मू ! ख्बाबों और ख्वाहिशों का सिलसिला सा है; पूरा होता तो है पर खत्म नहीं होता।  कामनी गुप्ता*** जम्मू!
  आँखों में सादगी, शब्दों में सच्चाई होती है।  कुछ लोग जाने क्यों दिल को छू लेते हैं।  कामनी गुप्ता*** जम्मू!