Hindi Poetry मई 07, 2024 शब्दों के शोर में जाने कितने रिश्ते उल्झ गए; रास्ते बदले और फिर यूँ भीड़ में खो गए। कामनी गुप्ता*** जम्मू! शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेबल hindi life poetry relation शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
दिसंबर 08, 2024 खुश रहें सब सदा जब हम ये चाहेंगे शब्द हैं ये फिर वापिस लौट के आएंगे। कामनी गुप्ता*** जम्मू! और पढ़ें
Hindi Poetry मई 06, 2024 ढेरों ख्वाहिशें लेकर चले थे जो कभी; ज़िन्दगी बढ़ती और ख्वाहिशें घटती गई। कामनी गुप्ता*** जम्मू! और पढ़ें
गुफ्तगू मई 27, 2024 ख्बाबों में उनसे यूँ ही गुफ्तगू होती रही रातभर। सितारों की महफ़िल में जुगनू खोजती रहीं रातभर। कामनी गुप्ता*** जम्मू! और पढ़ें
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